केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही ऐसा हे, जो हमारे दुः खो को सदा के लिए नष्ट कर सकता है। - स्वामी विवेकानंद



मनोरंजन

टेक्निकल हो गये हैं वर्तमान दौर के गाने: मोंटी
04/15/2013 03:52PM

शब्द और सुर को फिल्मी संगीत के दो पहलू बताते हुए संगीतकार मोंटी शर्मा ने कहा कि वर्तमान दौर के गाने टेक्निकल हो गये हैं और संगीत से आत्मा गायब होती जा रही है। इसलिए लोग आज भी पुराने दौर के गीतों को अधिक तरजीह देते हैं। मोंटी ने कहा कि पुराने गीतों को टेक में रिकॉर्ड नहीं किया जाता था। इसलिए उस स्पंदन को आज भी महसूस किया जा सकता है। वहीं, वर्तमान दौर में गाने टेक्निकल हो गये हैं और फिल्मी संगीत से आत्मा लुप्त होती जा रही है। मोंटी ने ब्लैक, देवदास और सांवरिया जैसी फिल्मों का पाश्र्व संगीत संयोजन किया है। उन्हें ब्लैक के लिए फिल्म फेयर और आईफा सहित कई पुरस्कार मिले थे। मोंटी ने रन भोला रन, मिर्च, वादा रहा, चमकू और राइट या रांग में संगीत दिया है। प्रसिद्ध संगीतकार प्यारेलाल (लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल) के भतीजे ने कहा कि मैं इस वक्त संजय लीला भंसाली की रामलीला और एक अन्य निर्देशक की फिल्म मैरीकाम में पाश्र्व संगीत संयोजन कर रहा हूं। इसके अलावा सिम्फोनी के साथ गुरबानी तैयार कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि पाश्र्व संगीत बिना कोई भी फिल्म शव के समान हो जायेगी। बैकग्राउंड म्यूजिक के जरिये फिल्म की कमियों को ढक दिया जाता है और शास्त्रीय संगीत को जानने वाला पाश्र्व संगीतकार फिल्म की सफलता में बेहद अहम भूमिका निभाता है। मोंटी ने बताया कि वह फिल्म निर्देशन भी करने जा रहे हैं, ताकि अपने तरीके से अपना संदेश लोगों तक पहुंचा सकें। फिल्मों की परिधि बहुत बड़ी है और यह मनोरंजन के साथ लोगों तक संदेश देने का भी माध्यम हैं। फिल्म निर्माण एवं निर्देशन के जरिये वह अपनी बात लोगों तक पहुंचाने में कामयाब हो सकेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि नये कॉपीराइट एक्ट के जरिये पाश्र्व संगीतकार को भी रॉयल्टी मिलने लगी है। इसके चलते ही सांवरिया के गीत जब से तेरे नैना.. को छह करोड़ लोगों ने डाउनलोड किया तो उन्हें 19 लाख रुपये बतौर रॉयल्टी भी मिली। फिल्मफेयर के आरडी बर्मन पुरस्कार से नवाजे जा चुके मोंटी ने कहा कि शब्द और सुर फिल्म संगीत के दो पहलू है। सुर, ताल और लय के बिना किसी भी तरह के संगीत का सृजन नहीं किया जा सकता है। मैं सबसे पहले चरित्र को महसूस करता हूं, क्योंकि बहुत सारी चीजें इसमें छिपी होती हैं और इसके बाद सात सुरों के समंदर में जाता हूं। उन्होंने बताया कि पीरियड फिल्म में संगीत देने के लिए उस दौर के संगीत को समझना पड़ता है और उस संगीत का वर्तमान दौर से मिलाना पड़ता है। इस तरह उन्होंने देवदास में रवीन्द्र संगीत के साथ सिम्फोनी को मिलाया था। हर व्यक्ति अपने तरीके से काम करता है और क्लासिक काम तभी किया जा सकता है, जब रगों में सुर मिला हो। संगीत आधारित टेलेंट शो के बारे में मोंटी ने कहा कि नये बच्चों को यह शो बहुत कुछ सिखा देता है, लेकिन हरदम सीखने और कुछ नया करने वाले लोग ही उन्नति के शिखर पर पहुंच सकते हैं।

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