केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही ऐसा हे, जो हमारे दुः खो को सदा के लिए नष्ट कर सकता है। - स्वामी विवेकानंद



अजब-गजब

अब मोबाइल फोन से ही छू सकेंगे एक दूसरे के प्राइवेट पार्ट,
04/21/2013 04:19PM

अभी तक आपने तकनीक के वि‍भि‍न्‍न रंग हॉलीवुड की फि‍ल्‍मों में ही देखे होंगे कि कैसे उन फि‍ल्‍मों में तकनीक की मदद से सैकड़ों क्‍लोन तैयार हो जाते हैं या फि‍र कैसे तकनीक की मदद से लोग एक दूसरे से अभि‍साररत हुए बगैर चरम सुख पा लेते हैं। तकनीक के यह रंग अब हकीकत में तब्‍दील हो रहे हैं। कांडोम बनाने वाली कंपनी ड्यूरेक्‍स ने एक ऐसा मोबाइल ऐप और अंडरवि‍यर बनाया है, जि‍ससे एक दूसरे से दूर रहने वाले प्रेमी जोड़े फोन पर ही सहवास का आनंद प्राप्‍त कर सकेंगे। कंपनी ने इस ऐप को कैसे यूज करना है, इसका वीडि‍यो यू ट्यूब पर डाला है जि‍से अब तक 17 लाख से भी ज्‍यादा बार देखा जा चुका है। यू ट्यूब पर कंपनी ने इस ऐप और अंडरवि‍यर के बारे में बताया है। इन अंडरवि‍यर्स को कंपनी ने फंडावि‍यर्स का नाम दि‍या है। यह फंडावि‍यर्स सिर्फ आईफोन पर काम करेंगे। आईफोन से फंडावि‍यर्स को कनेक्‍ट करने के लि‍ए कंपनी ने कि‍स वायरलेस तकनीक का प्रयोग कि‍या है, यह नहीं बताया गया है, बहरहाल, आईफोन आपके उस अंडरवि‍यर से कनेक्‍ट रहेगा, जो कंपनी ने स्‍पेशली इस ऐप के लि‍ए बनाए हैं। इन फंडावि‍यर्स में पुरुषों और महि‍लाओं के लि‍ए अलग अलग कास्‍ट्यूम है । इस वीडि‍यो में बताया गया है कि महि‍ला और पुरुष के अंडरवि‍यर में सेंसर लगाए गए हैं। आईफोन के लि‍ए बनाया गया ऐप का कनेक्‍शन इन्‍हीं सेंसर्स से रहता है। दूर बैठा साथी जब उस ऐप की मदद से अंडरवि‍यर के कि‍सी हि‍स्‍से को छूता है तो वहां लगे सेंसर शरीर में सि‍हरन पैदा करते हैं। कंपनी का दावा है कि इन सेंसर्स से उत्‍तेजना पैदा होती है। हालांकि अभी इस ऐप को फाइनली जारी नहीं कि‍या गया है, कंपनी के मुताबि‍क अभी इस पर और प्रयोग जारी हैं। यूट्यूब पर जारी वीडि‍यो में इस ऐप के लि‍ए ऑस्‍ट्रेलि‍या के युगल ने मॉडलिंग की है। थ्री-डी इलेक्ट्रोड्स के इस्तेमाल से इलिनॉय युनिवर्सिटी की एक रिसर्च टीम ने ऐसी माइक्रो बैटरी बनाई है, जो मौजूदा बैटरियों की तुलना में एक हजार गुना तेज चार्ज होती है। इनका इस्तेमाल स्मार्टफोन और अन्य गैजेट में हो सकता है। हालांकि, ऑक्सफोर्ड युनिवर्सिटी के प्रो. पीटर एडवर्ड कहते हैं लीथियम-कोबाल्ट ऑक्साइड बैटरियों की तरह ही इस माइक्रो बैटरी में खुद ही जल उठने की संभावना है। रिसर्च टीम का कहना है कि वे इस सुरक्षित बनाने के लिए पोलिमर बेस्ड इलोक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल करेंगे।

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