धर्म और समाजसदाचरण से मिला सुख ही सच्चा है04/15/2013 04:20PM नई दिल्ली।। विवेकानंद योगाश्रम पटपड़गंज रोड खुरेजी में सत्संग के अवसर पर आचार्य विक्रमादित्य ने कहा कि सदाचरण से प्राप्त आनंद के अतिरिक्त जो सुख की पूर्ति होती है वह सच्ची और वास्तविक नहीं होती। उस परमानंद के स्रोत सदाचार के केवल पांच स्तंभ हैं- दुर्गुणों का त्याग, परोपकार, विनम्रता, सत्य और दया। सत्संग है मानव रूपी पौधे की जड़ सनातन धर्म शिव मंदिर पुष्प विहार, साकेत में श्रीराम कथा सुनाते हुए मानस मधुकर कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि जब हम पौधे का रोपण करते हैं तो जड़ में ही पानी देते हैं। ठीक उसी प्रकार मानव रूपी पौधे की जड़ सत्संग है। अगर समग्र जीवन को हरा-भरा रखना है, तो संस्कार रूपी जल से इस पौधे का सिंचन करना होगा। त्याग की प्रतिमूर्ति होते हैं संत महागौरी मंदिर, डी ब्लॉक खजूरी खास सत्संग में डॉ. भोला दत्त पांडे ने कहा कि साधु संत त्याग, सहनशीलता और क्षमा की साक्षात प्रतिमूर्ति होते हैं। इन्हीं कारणों से उनका जीवन अनुकरणीय व प्रेरक बन जाता है। कल्याण की भावना साधुओं की पहचान है सिद्धपीठ कालिका मंदिर कालका जी में महंत सुरेन्द्र नाथ ने कहा कि मन, वाणी और कर्म से प्राणी जगत के कल्याण की कामना और भावना करना ही साधुओं की मूल पहचान है। अत: साधु कहलाने वालों को इसकी मर्यादा रखनी चाहिए। जीव-ब्रह्मा का एकाकार ही राम-भारत मिलाप है श्रीराम मंदिर सी-3 जनकपुरी में श्रीराम कथा के दौरान संत अजय मिश्र ने कहा कि भरत एवं राम परस्पर व्यवहार प्राणी मात्र को कुशल मार्ग दर्शन एवं दिव्यता प्रदान करता है। जीव और ब्रह्मा का एकाकार होना ही राम-भारत मिलाप है।
|
|
Copyright © 2022 K7 News
|
Designed & Developed By k7 news
|