धर्म और समाजचौथी देवी कूष्मांडा की पूजा04/15/2013 04:16PM
पं. केवल आनंद जोशी माता दुर्गा के चौथे स्वरूप का नाम कूष्मांडा है। नवरात्रों में चौथे दिन कूष्मांडा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। अपनी मंद हल्की हंसी द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कूष्मांडा पड़ा। देवी कूष्मांडा की उपासना मनुष्य को स्वभाविक रूप से भवसागर से पार उतरने के लिए सुगम और श्रेयस्कर मार्ग है। माता कूष्मांडा की उपासना मनुष्य को आधिव्याधियों से विमुक्त करके उसे सुख समृद्धि और उन्नति की ओर ले जाती है। लौकिक स्वरूप में यह बाघ की सवारी करती हुईं, अष्टभुजाधारी, मस्तक पर रत्नजड़ित स्वर्ण मुकुट वाली एक हाथ में कमंडल और दूसरे हाथ में कलश लिए हुए उज्जवल स्वरूप की दुर्गा हैं। इसके अन्य हाथों में कमल, सुदर्शन चक्र, गदा, धनुष बाण और अक्ष माला विराजमान है। इन सब उपकरणों को धारण करने वाली कूष्मांडा अपने भक्तों को रोग, शोक और विनाश से मुक्त करके आयु यश बल और बुद्धि प्रदान करती हैं।
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