केवल आध्यात्मिक ज्ञान ही ऐसा हे, जो हमारे दुः खो को सदा के लिए नष्ट कर सकता है। - स्वामी विवेकानंद



मप्र में भाजपा को 90 विधायकों की जीत पर संशय
04/15/2013 05:59PM

भोपाल। मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आगामी विधानसभा चुनाव में 90 विधायकों के फिर से चुनाव जीतने को लेकर संशय है, और इसीलिए भाजपा 70 से अधिक विधायकों को दोबारा उम्मीदवार न बनाने का मन बना रही है। इन विधायकों के खिलाफ उनके क्षेत्रों में असंतोष भी नजर आ रहा है। भाजपा की ओर से पिछले दिनों कराए गए आंतरिक सर्वेक्षण में पता चला है कि अगर पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव नहीं किया तो विधानसभा चुनाव में जीत की हैट्रिक आसान नहीं होगी, क्योंकि विधायकों को लेकर पनपा असंतोष सरकार के खिलाफ भी जा सकता है। विधानसभा की 230 सीटों में से भाजपा के पास 152 सीटें हैं। इन्हें पार्टी ने तीन श्रेणियों में बांटा है। एक श्रेणी वह है, जिसमें जीत सुनिश्चित है। दूसरी श्रेणी में मेहनत के बल पर जीत तय की जा सकती है, तो तीसरी श्रेणी में जीत आसान नहीं है। प्रथम श्रेणी में 60 सीटें हैं। इन क्षेत्रों के विधायकों को दोबारा मौका दिया जा सकता है। दूसरी श्रेणी में 90 सीटें है, जबकि तीसरी श्रेणी में 80 सीटें हैं। भाजपा के आंतरिक सर्वेक्षण के अनुसार, दूसरी श्रेणी की 90 सीटों पर यदि जीत सुनिश्चित करनी है, अथवा बेहतर नतीजे पाने हैं तो वहां के वर्तमान विधायकों को जनता के बीच जाकर मेहनत करनी होगी और अपनी छवि सुधारनी होगी। यदि ऎसा नहीं हो सका तो नए चेहरों को मौका देना होगा। वहीं तीसरी श्रेणी में जीत मुश्किल है। इस श्रेणी की 80 सीटों में से 40 पर भाजपा के विधायक हैं। भाजपा को यदि इन 40 सीटों पर जीत दोहरानी है तो उसे नए चेहरों को मैदान में उतारना होगा। सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने यह आत्म मूल्यांकन जनता की संतुष्टि और क्षेत्रीय विधायकों की कार्यशैली को ध्यान में रखकर किया है। भाजपा की मिशन 2013 की तैयारियां जारी हैं और वह हर हाल में जीत की हैट्रिक बनाना चाहती है। यही कारण है कि पार्टी तथा सरकार की ओर से मतदाताओं को भरमाने के साथ ही उन तक पहुंचने के लिए तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। यह चुनाव मुख्यमंत्री की प्रतिष्ठा से भी जु़डा हुआ है। पार्टी का मानना है कि अगर इस साल के अंत में होने वाले चुनाव में जीत दर्ज करानी है तो कई क़डे फैसले लेने के साथ ही नए चेहरों पर दांव लगाकर युवा नेतृत्व को विकसित करना होगा, क्योंकि यह युग ही युवा शक्ति का है।

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